किस श्राप के कारण स्त्रियां बनाती हैं गैर मर्दों से संबंध

नमस्कार दोस्तों, एक बार पुनः स्वागत है आप सभी का, आपके अपने यूट्यूब चैनल, इन्पेरशनल स्टोरी पर दोस्तों आज आप इस कहानी में जानेगे की स्त्रियां किस श्राप के कारण गैर पुरुषों के साथ शारीरिक संबंध बनाती है और वो अपनी काम वासना पर काबू क्यों नहीं कर पाती है ? तो दोस्तों चलिए गौर करते है जीवन की एक सच्ची कहानी की तरफ। इसके अलावा हें माता लक्ष्मी जो भी भक्त इस वीडियो को लाइक करें और चैनल को सब्सक्राइब करके
कमेंट में जय माता लक्ष्मी लिखे, उनके घर में धन की कभी कोई कमी न रहे। उनका घर हमेशा धन से भरा रहे।

मित्रों, प्राचीन काल की बात है। देवराज इंद्र अपने घोड़े पर सवार होकर वन भ्रमण के लिए निकलते हैं अर्थात जंगल में घूमने के लिए निकलते हैं और जैसे ही देवराज इंद्र अपने घोड़े को लेकर घूम रहे होते हैं तो उन्हें उस वन के अंदर एक कुटिया दिखाई देती है और जब वो ध्यान से देखते हैं तो उस कुटिया के अंदर एक बहुत ही सुंदर स्त्री  दिखाई देती है और जैसे ही देवराज
इंद्र को वो सुंदर स्त्री दिखाई पड़ती है तो देवराज इंद्र उस सुंदर स्त्री को देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं और मन ही मन उससे प्रेम कर बैठते हैं। मित्रों उस सुंदर स्त्री को देखकर देवराज इंद्र इस कदर उसके प्यार में खो जाते हैं कि वो अपना धर्म भी भूल जाते हैं और उसे खुद से ज्यादा प्रेम करने लगते हैं।

प्रिय मित्रों, उस समय देवराज इंद्र को ये पता नहीं था कि जीस स्त्री से वह प्रेम कर रहे हैं। वो स्त्री तो महान तेजस्वी गौतम ऋषि  की पत्नी है।

प्रिय मित्रों, उस दिन तो देवराज इंद्र गौतम ऋषि की पत्नी को दूर से ही देखकर चले जाते हैं परंतु इंद्रलोक में पहुंचने के बाद देवराज इंद्र का मन बेचैन हो जाता है और वो हर समय उसी स्त्री के बारे में सोचने लगते हैं, जिससे सुंदर स्त्री को उन्होंने उस जंगल में देखा था। मित्रों जैसे तैसे करके देवराज इंद्र रात्रि तो काट लेते हैं लेकिन सुबह होते ही वो फिर से अपने घोड़े पर सवार होकर उसी जंगल की ओर निकल पड़ते हैं और चलते चलते उसी कुटिया के पास पहुँच जाते हैं।

जहाँ वो एक दिन पहले आए थे और उस कुटिया के पास पहुँचकर गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या को जी भरकर निहारने लगते हैं। लेकिन इस बात का पता ना तो गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या को होता है और ना ही गौतम ऋषि  को होता है कि देवराज इंद्र उन्हें छुप छुप कर देख रहे हैं। गौतम राशि की गिनती महान ऋषियों  में आती है। वह बहुत ही महान तेजस्वी संत थे। बह अपने धर्म और कर्म का पालन करते हुए अपना जीवन यापन कर रहे थे। वो प्रतिदिन ब्रह्ममुहूर्त में उठते
और गंगा स्नान के लिए जाते और उसके बाद भगवान की भक्ति में लीन हो जाया करते थे। दोस्तों देवराज इंद्र ने गौतम ऋषि की  यह सारी गतिविधियाँ छुप छुपकर देख ली थी कि वो किस किस समय पर क्या क्या करते है। प्रिय मित्रों, अब तो देवराज इंद्र गौतम ऋषि  की पत्नी अहिल्या के प्यार में इस कदर दीवाने हो गए थे कि उनका मन इंद्रलोक में बिल्कुल भी नहीं लगता था। अब तो वो प्रति दिन उस कुटिया के आसपास आते थे और छुप छुपकर गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या को निहारते रहते थे।

फिर वो अपने मन में विचार करने लगे कि आखिर इस स्त्री को मैं किस प्रकार प्राप्त करूँ कि मैं इस के साथ शरारिक संबंध बना सकूँ और एक बार देवराज इंद्र अहिल्या से मिलने की चाह लिए चंद्रमा के पास पहुंचते हैं और चन्द्रमा से कहते हैं कि हे चन्द्रमा आप हमारी मदद करो तभी चन्द्रमा कहता है हे देवराज इंद्र मुझे आपकी किस कार्य में मदद करनी है? स्पष्ट बताइए प्रिय मित्रों, तभी देवराज इंद्र चंद्रमा से कहते हैं आपको मेरा एक कार्य करना होगा।

चन्द्रमा कहते हैं कि बताइए प्रभु मुझे क्या करना होगा? तो देवराज इंद्र चंद्रमा को बताते हैं कि देखो चन्द्रमा मुझे एक स्त्री बहुत ही पसंद आ गई है इसलिए मुझे उसके साथ छल करना है और उसके साथ छल करने में आपको मेरी मदद करनी है। तभी चन्द्रमा कहते हैं हे देवराज इंद्र मुझे साफ साफ बताइए करना क्या है? तो देवराज इंद्र चंद्रमा से कहते हैं तुम मेरे साथ पृथ्वी लोक पर चलो और एक मुर्गा का रूप धारण करो। तुम मुर्गा बनकर मध्य रात्रि में आवाज लगा देना।

जैसे ही तुम अधि रात्रि में आवाज लगाओगे तो तुम्हारी आवाज को सुनते ही गौतम ऋषि जाग जाएंगे और वो समझेंगे कि अब सुबह हो चुकी है और वह गंगा स्नान को चले जाएंगे। उसी समय मैं उनकी पत्नी अहिल्या के साथ छल कर लूँगा। दोस्तों एक बात हम आपको और बताते चले कि कोई भी व्यक्ति उसी को अपने दिल की बात बताता है जिससे उसके विचार भली भांति मिलते हैं अर्थात जो उसके जैसे विचारों का होता है। दोस्तों चन्द्रमा और इन्द्र
एक विचारों के थे क्योंकि प्रिय मित्रों चन्द्रमा भी अपने गुरु की पत्नी को लेकर भाग गया था और इंद्र ने भी एक महान ऋषि की पत्नी के साथ छल किया था।

दोस्तों दोनों के विचार एक जैसे थे। मित्रों अब ये दोनों ही पृथ्वी लोक पर जाते हैं और गौतम ऋषि  की कुटिया के पास जाकर छुप जाते हैं और जैसे ही मध्यरात्रि होती है फिर चन्द्रमा मुर्गा बनके आवाज़ लगा देता है। उस मुर्गा का आवाज़ सुनकर गौतम ऋषि की आंख खुल जाती हैं और वो गंगा स्नान के लिए

अपना कमंडल कपड़े ले कर निकल जाते है। दोस्तों गौतम ऋषि  उस मायाजाल को नहीं समझ पाते हैं। वो ये नहीं समझ पाते हैं कि यह एक माया है। अब गौतम ऋषि  गंगा स्नान को चले जाते हैं और उसी समय देवराज इंद्र गौतम ऋषि का भेष बनाते हैं और अहिल्या से छल करने के लिए उनकी कुटिया में घुस जाते हैं और अहिल्या के पास जाकर मीठी मीठी प्रेम की बातें करने लगते हैं और बातें करते करते देवराज इंद्र अहिल्या को अपनी बांहों में जकड़ लेते हैं और दोस्तों उधर क्या होता है? जब गौतम ऋषि  नदी के किनारे गंगा स्नान करने के लिए पहुंचते हैं तो वो क्या देखते हैं कि काफी समय हो गया। अभी तक सुबह भी नहीं हुई और मेरे सिवाय कोई स्नान करने भी नहीं आया, ना ही कोई पशु पक्षी

और अन्य जीव की आवाज भी नहीं आई थी। अर्थात उन्हें किसी भी प्रकार की कोई भी हलचल दिखाई नहीं देती है। तो दोस्तों इस बात को वे भली भांति समझ जाते हैं कि हो ना हो ये किसी की मायावी चाल है। इस बात का उन्हें आभास हो जाता है कि अवश्य मेरे साथ छल हो रहा है। अपने मन में यह विचार करने के बाद गौतम ऋषि वहाँ से तुरंत कुटिया की ओर दौड़ने लगते हैं और जैसे ही वो अपनी कुटिया के समीप आते हैं तो वो क्या देखते हैं कि कुटिया के द्वार पर एक मुर्गा बैठा हुआ है।

फिर गौतम ऋषि अपने हाथ पर जल लेते हैं और मंत्र पढ़कर उस मुर्गा पर मारते हैं तो वह चंद्रमा अपने असली रूप में आ जाता है और जैसे ही कुटिया के अंदर पहुंचते हैं तो देखते है उन्हीं के भेष में एक पुरुष उनकी पत्नी के साथ शारीरिक संबंध बना रहा है। मित्रों, जैसे ही गौतम ऋषि  इस दृश्य को देखते हैं तो उन्हें अत्यधिक क्रोध आ जाता है और उनके नेत्र लाल हो जाते हैं और कहते हैं कि हे मूर्ख स्त्री तुझे अपने और पराये में कोई फर्क नजर नहीं आया।

तुझमें अपने और पराये को पहचानने की शक्ति नहीं है। ऐसी स्त्री होने से क्या लाभ? तुझे तो पत्थर हो जाना चाहिए और वो अपनी पत्नी को पत्थर होने का श्राप दे देते है। उसके बाद वे और भी अधिक क्रोधित होजाते है और इंद्र को काम वासना का भूखा समझकर इंद्र को श्राप देते हुए कहते हैं देवराज इंद्र तुम्हारे अंदर काम वासना की शक्ति बहुत अधिक है और तुम हर स्त्री पर मोहित हो जाते हो इसलिए मैं तुम्हें श्राप देता हूँ कि तुम्हारे शरीर पर हजारों योनिया बन जाएंगे।

मित्रोंजैसे ही यह श्राप गौतम ऋषि ने  इंद्रदेव को दिया  तो उसी समय देवराज इंद्र के शरीर पर हजारों योनियां बन जाती है। दोस्तों यह सब कुछ देखकर देवराज इंद्र गौतम ऋषि  के चरणों में गिरकर क्षमा याचना करने लगते हैं और अपने द्वारा किए गए पाप की क्षमा मांगने लगते हैं। मित्रों इंद्र के बार बार विनती करने के बाद गौतम ऋषि  इंद्र से कहते हैं कि हे इंद्र मैं अपने श्राप को वापस तो नहीं ले सकता और ना ही मेरे मुख से निकला हुआ श्राप झूठा हो सकता है।

लेकिन मैं उसमें बदलाव अवश्य कर सकता हूँ। इसलिए हे देवराज इंद्र जो तुम्हारे शरीर पर हजारों योनिया बन गई है, यह योनि आंखो में परिवर्तित हो जाएंगी। इनके जगहों पर हजारों आंखें बन जाएंगे। दोस्तों गौतम ऋषि के ऐसे कहते ही वो योनियां आँखों में परिवर्तित हो गई और मित्रों गौतम ऋषि ने जो अपनी पत्नी को पाषंड होने का श्राप दिया था तो गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या उनसे कहती हैं कि हे स्वामी इसमें मेरा कोई दोष नहीं है।
जो आपने मुझे पाषंड होने का श्राप दे दिया। मुझे इस बात का बिल्कुल भी अहसास नहीं हुआ।

की मेरे साथ कोई अन्य पुरुष छल कर रहा है क्योंकि वह तो आप के रूप में आया था। मैं तो आपको ही समझ रही थी। इसलिए इस गतिविधि में मेरी कोई भी गलती नहीं है। मेरा कोई भी कसूर नहीं है। दोस्तों उनके मुख से ऐसी बात सुनने के बाद गौतम ऋषि अपनी पत्नी अहिल्या से कहते हैं कि मैं अपने मुख से दिया हुआ श्राप वापस तो नहीं ले सकता, परंतु मैं तुम्हे एक वरदान अवश्य दे सकता हूँ। कुछ समय बाद जब भगवान श्री  हरि विष्णु मर्यादा पुरुषोत्तम
भगवान श्री राम के रूप में अवतरित होंगे तब वो ही आ करके तुम्हारा उद्धार करेंगे।

उनकी चरण स्पर्श से ही तुम्हारा उद्धार होगा। उनके चरणों से स्पर्श होते ही तुम पुनः उसी रूप में आ जाओगी। दोस्तों इस प्रकार से काफी समय व्यतीत हो जाता है और भगवान श्रीहरि विष्णु मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के रूप में अवतरित होते हैं और अवतरित होने के बाद अपने गुरु के साथ उसी स्थान पर पहुंचते हैं जिससे स्थान पर गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या पत्थर की शिला बनी हुई थी।

तो वो अपने गुरु से पूछते हैं कि हे गुरुदेव यह पत्थरनुमा स्त्री कौन हैं तो उनके गुरूजी बताते हुए कहते हैं हे राम ये गौतम ऋषि की पत्नी हैं और वर्षों पहले से आपकी प्रतीक्षा कर रही है कि आप यहाँ आये और इनका उद्धार करें। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम अपने चरण उस शिला से छुआते है और वो शीला एक स्त्री के रूप में परिवर्तित हो जाती है अर्थात अहिल्या का उद्धार हो जाता है। दोस्तों स्त्री बहुत ही भोली होती है और उसे प्यार का लालच देकर के आसानी से वश में किया जा सकता है।

हर स्त्री अपने पति से यही उम्मीद करती है कि उसका पति उससे प्यार करे, उसकी इज्जत करें। और उन्हें बो प्यार जब अपने पति से नहीं मिलता तो बो उस प्यार की लालच में गैर मर्दो से सम्बन्ध बनाने की लालच में आ  जाती है  तो दोस्तों येसी ही वीडियो देखने के लिये हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर लीजिये और वीडियो को लाइक करके ज्यादा से ज्यादा लोगो तक शेयर करे

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